वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नवम् दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 37 मेडल और 14 पीएचडी उपाधियां प्रदान

वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,देहरादून का नवम् दीक्षान्त समारोह सफलतापूर्वक सम्पन्न।
वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून के नवम दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को ३७ स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक के साथ-साथ १४ शोधार्थियों को पी.एच.डी. की उपाधि।
महामहिम राज्यपाल उत्तराखण्ड/ कुलाधिपति ले. जनरल गुरमीत सिंह,पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) द्वारा दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को सम्बोधित किया।
वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में २२-०४-२०२६ को नवम दीक्षांत समारोह का सफलतापूर्वक आयोजन हुआ। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में ले. जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) राज्यपाल उत्तराखण्ड/कुलाधिपति ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. धन सिंह रावत, माननीय मंत्री शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री ने भी प्रतिभाग किया। डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, आई.ए.एस, सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा, उत्तराखण्ड शासन कार्यक्रम ने अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
सर्वप्रथम विश्वविद्यालय परिसर में महिला छात्रावास का लोकार्पण ले. जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) राज्यपाल उत्तराखण्ड /कुलाधिपति महोदय, विशिष्ट अतिथि डॉ. धन सिंह रावत, माननीय मंत्री शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, आई.ए.एस, सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा, उत्तराखण्ड शासन, विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफ. तृप्ता ठाकुर के कर कमलों द्वारा किया गया।

समस्त अतिथियों के मंचासीन होने के उपरांत विश्वविद्यालय सभागार में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, कुलगीत व तदोपरांत दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण द्वारा कार्यक्रम का विधिवत सुभारम्भ किया गया। कुलपति, प्रोफ. तृप्ता ठाकुर द्वारा ले. जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) राज्यपाल उत्तराखण्ड/कुलाधिपति, विशिष्ट अतिथि डॉ. धन सिंह रावत, मंत्री शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री व डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, आई.ए.एस, सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा, उत्तराखण्ड शासन को शॉल एवं प्लांटर प्रदान कर स्वागत एवं अभिनन्दन किया।
वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में अपना बहुमूल्य समय देने के लिए, उत्तराखण्ड प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालय से आये सभी कुलपतिगणो का, विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफ. तृप्ता ठाकुर ने ह्रदय की गहराईयो से स्वागत एवं अभिनन्दन किया।
कुलपति, प्रोफ. तृप्ता ठाकुर के निवेदन प्रस्ताव पर महामहिम राज्यपाल उत्तराखण्ड/ कुलाधिपति ले. जनरल गुरमीत सिंह द्वारा दीक्षांत समारोह प्रारम्भ की घोषणा की। कुलपति, प्रोफ. तृप्ता ठाकुर द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया, जिसमे कुलपति द्वारा अंतिम दीक्षांत समारोह से मार्च २०२६ के मध्य विश्वविद्यालय की उपलब्धियों से सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं विधार्थियों को अवगत करवाया। कुलपति द्वारा बताया गया कि नवम दीक्षांत समारोह में वर्ष नवंबर २०२४ से मार्च २०२६ की समयावधि में पी.एच.डी. पूर्ण करने पर १४ शोधार्थियों को पी.एच.डी. की उपाधि, सत्र २०२४-२५ में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों हेतु बी.टेक. के २४५५, बी.आर्क. के १२, बी.ए.एल.एल.बी. के १०२, बी.बी.ए.एल.एल.बी. के २१, बी.एच.एम.सी.टी. के १०२, बी.फार्म के ६३३, एल.एल.बी. के २५७, कुल ३५८२ विद्यार्थियों तथा परास्नातक पाठ्यक्रमों में एम.फार्म के २४०, एम.टेक. के ५९, एम.बी.ए. के ९७६, एम.बी.ए. (इंटीग्रेटेड) के २९, एम.सी.ए. के १५३, एल.एल.एम. के ८८, कुल १५४५ विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की जा रही है। सभी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं उनके परिजनों को ह्रदय से शुभकामनाये दी।
कुलपति महोदय द्वारा अवगत करवाया गया कि दीक्षांत समारोह में स्नातक व परास्नातक पाठ्यक्रमों में सत्र २०२४-२५ हेतु ३७ स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक के साथ-साथ, बी.टेक की ओवरआल टॉपर सुश्री गुंजन भटनागर, तुलास इंस्टिट्यूट, देहरादून को विनोद देवी अग्रवाल मेमोरियल स्वर्ण पदक प्रदान किया जायेगा।
वर्तमान में विश्वविद्यालय में कुल २६,११५ विद्यार्थी अध्यनरत है, जिनमे २२,२२९ स्नातक स्तर के ३,८१६ परास्नातक स्तर के व १२१ शोधार्थी है। विश्वविद्यालय के शोधार्थियों द्वारा 37 पेटेंट पंजीकृत किये गए है, जिनमे से 25 पेटेंट प्रकाशित किये गए है। जो विश्वविद्यालय के शोध उन्मुख वातावरण को दर्शाता है।
कुलपति द्वारा यह भी अवगत कराया कि विश्वविद्यालय द्वारा अब तक ३४,२५७ विद्यार्थियों को डिजिलॉकर के माध्यम से उपाधिया प्रदान की जा चुकी है, जो विश्वविद्यालय की पारदर्शिता एवं डिजिटल प्रतिबद्धता का प्रतिक है। अधोसंरचना विकास के क्रम में आज के शुभ दिन में विश्वविद्यालय परिसर में 124 सीट का महिला छात्रावास व टाइप-III के आवास का उद्घाटन भी किया गया है, जो आगामी सत्र से छात्राओं हेतु उपलब्ध रहेगा।
साथ ही विश्वविद्यालय के सभी ०६ परिसर संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्रों का सुभारम्भ किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-२०२० के वास्तविक आधार को साकार करने और विद्यार्थियों को वास्तविक परंपरागत ज्ञान से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।
राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान और विज्ञानं को साझा करने हेतु आई.आई.टी. रोपड़ व आई.आई.टी. रूड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थानो के साथ एम.ओ.यू. किये गए है। साथ ही जर्मनी के बुर्लिंग स्तिथ संस्थान के साथ अंतराष्ट्रीय सहयोग स्थापित किये गए है, साथ ही सेण्टर फॉर एक्सेलेंस लैब की स्थापना का कार्य गतिमान है।
विश्वविद्यालय में ए.आई. लिटरेसी मिशन का शुभारम्भ किया जायेगा, जिसका उद्देश्य शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को कृतिम बुद्धिमता के ज्ञान से सशक्त बनाना होगा। COE स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग लैब की स्थापना की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों की आधुनिक आद्यौगिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त होगा। विद्यार्थियों की सुविधा एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु EVORA APP विकसित की जाएगी।
कुलपति महोदय के उद्बोधन के उपरांत, सभी १४ पी.एच.डी. शोधार्थियों को मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कुलपति महोदय की उपस्थिति में उपाधि प्रदान की गई। तदोपरांत ए.आई. लिटरेसी व स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग विवरणिका का विमोचन किया गया।
जिसके बाद मुख्य अतिथि ले. जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) राज्यपाल उत्तराखण्ड/ कुलाधिपति महोदय द्वारा सभी छात्रों की उपाधियों को डिजिलॉकर में डिजिटली हस्ताक्षर किये।
डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, आई.ए.एस, सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा ने अपने उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करें तथा अपने निर्णयों, मूल्यों और दृष्टिकोण के माध्यम से अपनी पहचान स्थापित करें। साथ ही, तेजी से बदलते तकनीकी युग का उल्लेख करते हुए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डाटा साइंस जैसे क्षेत्रों में दक्षता विकसित करने पर जोर दिया।
उत्तराखण्ड की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा और पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी जैसी चुनौतियों के समाधान में युवा इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा ने यह भी कहा कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ सीखने की निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ”सपने खुली आँखों से देखने चाहिए और खुली आँखों से देखे सपनो को पूरा कर के ही रुकना चाहिए।“
उन्होंने छात्रों को विनम्रता अपनाने, सोच-समझकर निर्णय लेने और कर्तव्य से बढ़कर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दूरदृष्टि, जीवन में संतुलन और समाज की सेवा में समर्पण के महत्व पर बल दिया। अंततः दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक सफलता का उत्सव नहीं था, बल्कि जिम्मेदारी, विकास और भविष्य की आकांक्षाओं की याद दिलाने वाला भी था।
EVORA उत्तराखण्ड एनवायरनमेन्ट गार्डियन APP और सेण्टर फॉर इंडियन नॉलिज सिस्टम की विवरणिका का विमोचन मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि द्वारा किया गया। जिसके परिणाम विश्वविद्यालय एवं उत्तराखण्ड राज्य के लिए भविष्य में बहुत प्रभावी रहेंगे।
विशिष्ट अतिथि डॉ. धन सिंह रावत, मंत्री शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री ने अपने उद्बोधन में वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून का यह नवम दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आपके परिश्रम, समर्पण और सपनों की उपलब्धि का उत्सव है।
आज प्राप्त की गई यह डिग्री आपके जीवन की नई जिम्मेदारियों और अवसरों का द्वार खोलती है। उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में, जहाँ भौगोलिक चुनौतियाँ हैं, वहाँ तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति अत्यंत सराहनीय है। विश्वविद्यालय ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा पहुँचाने तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मंत्री ने अवगत करवाया कि विश्वविद्यालय ३५० नियमित पदों पर जल्दी ही नियुक्ति करवाएगा। सभागार में उपस्थित विभिन्न विश्वविद्यालयो से प्रतिभाग करने वाले सभी कुलपतियों से आग्रह किया कि गाँव गोद लेने की की सुन्दर परम्परा के तहत ही, प्रत्येक विश्वविद्यालय को अपने निकटतम क्षेत्र का ०१ आंगनवाडी और ०१ प्राथमिक विद्यालय भी गोद लेना चाहिये।
नई सुविधाओं के संबंध में अद्यतन जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय हेतु 16 करोड़ की निधि स्वीकृत की जा रही है। विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों के वेतन भत्ते हेतु भी राज्य सरकार निधि देने जा रही है।
आज का युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और डेटा साइंस का है। ऐसे में, आप सभी से अपेक्षा है कि आप केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार करें, समस्याओं का समाधान खोजें और समाज तथा राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें।आप अपने ज्ञान, कौशल और मूल्यों का उपयोग करते हुए न केवल अपने लिए, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में भी योगदान दें। माननीय मंत्री जी ने सभी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। आपका जीवन सफल, सुखमय और उद्देश्य पूर्ण हो।
मुख्य अतिथि ले. जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) राज्यपाल उत्तराखण्ड/कुलाधिपति महोदय ने अपने उद्बोधन में महान योद्धा वीर माधो सिंह भण्डारी के जीवन का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भण्डारी का जीवन साहस, तकनीकी कौशल और समाज सेवा का अद्भुत उदाहरण है, जिसने यह सिद्ध किया कि संकल्प और ज्ञान के समन्वय से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
आज आदिगुरु शंकराचार्य की जयंती और भगवान् केदारनाथ के कपाट खुलने के शुभ अवसर पर आज विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में उपस्थित होने पर गर्व की अनुभूति होने की बात कही।
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उपाधि एवं पदक प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा उनके माता-पिता और शिक्षकों के योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय तकनीकी शिक्षा, नवाचार और शोध के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना संस्थान की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।
साथ ही विद्यार्थियों से आवाहन किया कि वे केवल “नौकरी खोजने वाले”न बनें, बल्कि “नौकरी देने वाले”बनकर देश के विकास में योगदान दें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आज का युवा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला रहा है।
मुख्य अतिथि ले. जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) राज्यपाल उत्तराखण्ड/कुलाधिपति महोदय द्वारा समारोह में विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर के नेतृत्व की भी सराहना की गई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा का विस्तार और महिला शिक्षा को बढ़ावा देना समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।
सभी विद्यार्थियों को जीवन में निरंतर सीखते रहने, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व निभाने तथा टिकाऊ और नवाचारी तकनीकों के विकास के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा पीढ़ी ‘विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
माननीय ने कहा कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेन्स को भविष्य में एब्स्यूलूट इंटेलिजेंस के नाम से जाना जायेगा और वर्ष २०४७ तक इसको कॉस्मिक इंटेलिजेंस के नाम से जानेगी दुनिया और ये क्रांति भी भारत ही देन होगी। वास्तव में अब हम २१वी शताब्दी के लिए अब तैयार हो चुके है।
विश्वविद्यालय कुलसचिव डॉ.राजेश उपाध्याय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन में माननीय कुलाधिपति एवं राज्यपाल महोदय के प्रति हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त किया और आशा जताई कि उनका मार्गदर्शन भविष्य में भी विश्वविद्यालय को मिलता रहेगा। समारोह में उत्तराखण्ड सरकार के मा.शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनिकी शिक्षा और सहकारिता मंत्री, डॉ. धन सिंह रावत तथा तकनीकी शिक्षा व उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, डॉ. रंजीत सिन्हा (आईएएस) का ह्रदय की गहराईयो से आभार एवं धन्यवाद प्रस्तुत किया।
दीक्षांत समारोह कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने की। विश्वविद्यालय ने उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि उनके अनुभव से विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति करेगा। दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। साथ ही यह आशा व्यक्त की, कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।
कार्यक्रम में प्रोफ. एन.के. जोशी जी, मा.कुलपति, श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, टिहरी गढ़वाल, प्रोफ. सुरेखा डंगवाल जी, मा. कुलपति, दून विश्वविद्यालय, देहरादून, प्रोफ. प्रवेन्द्र कौशल जी, मा. कुलपति, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय हॉटीकल्चर एण्ड फॉरेस्टी, भरसार, पौड़ी गढ़वाल, प्रोफ. मनमोहन सिंह चौहान जी, मा. कुलपति, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर, प्रोफ. भानु दुग्गल जी, मा. कुलपति, हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तराखण्ड मेडिकल शिक्षा विश्वविद्यालय, देहरादून, विश्वविद्यालय की कार्य परिषद्, विद्या परिषद्, वित्त समिति तथा परीक्षा समिति के सदस्यगण, विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारीगण, शिक्षकगण एवं कर्मचारीगण, सम्मानित अतिथिगण, विभिन्न संस्थानों के निदेशकगण, चेयरमैन उपस्थित रहे।



