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थाईलैंड ओपन फाइनल में सात्विक-चिराग को हार, इंडोनेशियाई जोड़ी ने छीना खिताब

बैंकॉक।

भारत की स्टार पुरुष युगल बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी थाईलैंड ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब जीतने से चूक गई। बैंकॉक में खेले गए रोमांचक फाइनल में इंडोनेशिया की लियो कार्नांडो और डेनिएल मार्टिन की जोड़ी ने भारतीय खिलाड़ियों को 53 मिनट तक चले मुकाबले में 21-12, 25-23 से हराया।

पहले गेम में लय नहीं पकड़ सके सात्विक-चिराग

दुनिया की चौथे नंबर की भारतीय जोड़ी शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। चिराग शुरुआती सर्विस एक्सचेंज में संघर्ष करते दिखे, जिसका फायदा इंडोनेशियाई जोड़ी ने उठाया और जल्दी 4-1 की बढ़त बना ली। हालांकि भारतीय जोड़ी ने कुछ समय तक मुकाबले में बने रहने की कोशिश की, लेकिन लियो और डेनियल के आक्रामक स्मैश और तेज नेट प्ले के सामने वे टिक नहीं सके। इंडोनेशियाई खिलाड़ियों ने लगातार दबाव बनाए रखा और पहला गेम 21-12 से अपने नाम कर लिया।

दूसरे गेम में दिखाया जबरदस्त जज्बा

पहला गेम गंवाने के बाद सात्विक और चिराग ने दूसरे गेम में शानदार वापसी की। भारतीय जोड़ी ने तेज रफ्तार रैलियों और बेहतर नेट गेम के दम पर मुकाबले में बराबरी बनाई। एक समय भारतीय जोड़ी 7-5 से आगे निकल गई और फिर दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। स्कोर 14-14 से लेकर 19-19 तक बराबरी पर चलता रहा। इसके बाद इंडोनेशियाई जोड़ी ने लगातार चैंपियनशिप प्वाइंट हासिल किए, लेकिन सात्विक और चिराग ने शानदार जुझारूपन दिखाते हुए चार बार मुकाबला बचा लिया। हालांकि पांचवें चैंपियनशिप प्वाइंट पर भारतीय जोड़ी नेट में शटल मार बैठी और मुकाबला हार गई।

चोट के बाद शानदार वापसी

सात्विक और चिराग के लिए यह सीजन का पहला फाइनल था। सात्विक के कंधे की चोट के कारण भारतीय जोड़ी कुछ टूर्नामेंट नहीं खेल पाई थी, लेकिन वापसी के बाद उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। यह थाईलैंड ओपन में उनका तीसरा फाइनल था। इससे पहले भारतीय जोड़ी 2019 और 2024 में यहां खिताब जीत चुकी थी।

इंडोनेशियाई जोड़ी की ऐतिहासिक जीत

लियो कार्नांडो और डेनियल मार्टिन की जोड़ी के लिए यह जीत बेहद खास रही। दोनों खिलाड़ी दो साल बाद फिर साथ खेले थे, क्योंकि डेनियल घुटने की गंभीर चोट और सर्जरी के बाद वापसी कर रहे थे। यह पहली बार भी था जब इंडोनेशियाई जोड़ी ने सात्विक-चिराग को हराया। इससे पहले भारतीय जोड़ी का उनके खिलाफ 4-0 का रिकॉर्ड था। हालांकि भारतीय जोड़ी खिताब जीतने से चूक गई, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनके संघर्ष और जज्बे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे दुनिया की सबसे मजबूत पुरुष युगल जोड़ियों में शामिल हैं।

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