
नई दिल्ली।
पैरालंपिक में ऊंची कूद के स्टार एथलीट प्रवीण कुमार ने अपने अगले बड़े लक्ष्यों का खुलासा करते हुए कहा है कि वह लॉस एंजिल्स पैरालंपिक 2028 में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। इसके साथ ही उनका लक्ष्य विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना भी है।
एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान प्रवीण कुमार ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह इतनी दूर तक पहुंचेंगे। हालांकि अभी उनके कई लक्ष्य बाकी हैं, जिन पर वह लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उनके पास अभी स्वर्ण पदक नहीं है। ऐसे में 2027 में होने वाली प्रतियोगिता में वह गोल्ड मेडल जीतने की कोशिश करेंगे। हालांकि उनका प्राथमिक लक्ष्य लॉस एंजिल्स पैरालंपिक 2028 है।
स्कूल के दिनों में शुरू हुआ था ऊंची कूद का सफर
दो बार के पैरालंपिक पदक विजेता प्रवीण कुमार ने बताया कि ऊंची कूद में उनका सफर अचानक स्कूल के दिनों में शुरू हुआ था। उस समय वह नौवीं कक्षा में पढ़ते थे और एथलेटिक्स प्रतियोगिता के लिए उन्हें किसी एक स्पर्धा का चयन करना था। उन्होंने बताया कि उन्हें उस समय विभिन्न खेलों की जानकारी नहीं थी, इसलिए दोस्तों से सलाह ली। चूंकि वह पहले वॉलीबॉल खेलते थे, इसलिए दोस्तों ने उन्हें ऊंची कूद में हिस्सा लेने की सलाह दी। प्रवीण के अनुसार, उनके दोस्तों ने लकड़ी की छड़ी से अस्थायी क्रॉसबार बनाया और उन्होंने उसे आसानी से पार कर लिया। इसके बाद दोस्तों ने उन्हें प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
दिव्यांग होने के कारण नहीं मिला था मौका
प्रवीण ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए चयन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी और स्कूल अधिकारियों ने शुरुआत में उन्हें मौका देने से इनकार कर दिया था। अधिकारियों को आशंका थी कि दिव्यांग होने के कारण उन्हें परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपनी मां को यह बात बताई तो उन्होंने पूरा मामला समझा। बाद में परिवार और स्कूल प्रबंधन के हस्तक्षेप के बाद उन्हें प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का अवसर मिला। प्रवीण ने अधिकारियों से कहा था कि वह अपनी जिम्मेदारी खुद लेने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें प्रतियोगिता में भाग लेने दिया जाए।
प्रतियोगिता में भी उठे थे सवाल
पैराएथलीट ने बताया कि मुकाबले के दिन भी कुछ प्रतिभागियों ने उनके खेलने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने रेफरी से कहा था कि दिव्यांग होने के कारण उन्हें प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि एक शिक्षक ने उनका समर्थन करते हुए कहा था कि वह एक पैर से कूदेंगे, जबकि बाकी प्रतिभागियों के पास दोनों पैर हैं और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए।
पहले ही मुकाबले में मिला था पदक
प्रवीण कुमार ने बताया कि अपने पहले ही हाई जंप मुकाबले में उन्होंने पदक जीता था। वह पदक आज भी उनके पास सुरक्षित है और उसी से उनके खेल करियर की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि उस पहले पदक से शुरू हुआ सफर अब पैरालंपिक तक पहुंच चुका है, जहां वह देश के लिए पदक जीतने में सफल रहे। अब उनका लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और लॉस एंजिल्स पैरालंपिक 2028 में शानदार प्रदर्शन करना है। प्रवीण कुमार नेटोक्यो पैरालिंपिक में टी64 वर्ग में रजत पदक और पेरिस पैरालिंपिक में टी64 वर्ग में स्वर्ण पदक अपना नाम किया था।



