
भारतीय भाषाओं और संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की प्रतिष्ठा पर केंद्रित होगा लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव–2026
देहरादून, 23 अक्टूबर : पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आज देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव–2026 के आयोजन की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि 25 से 29 अक्टूबर तक लेखक गाँव, थानो, देहरादून में आयोजित होने वाला यह पाँच दिवसीय महोत्सव भारतीय भाषाओं की समृद्ध विरासत, हिंदी की वैश्विक प्रतिष्ठा और भारतीय ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास होगा। इस महोत्सव में 40 देशों के हिंदीभाषी विदेशी विद्यार्थी सहभागिता करेंगे, जिससे विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संवाद को नई ऊर्जा मिलेगी।

महोत्सव की केंद्रीय थीम ‘भारतीय भाषाएँ एवं संयुक्त राष्ट्र में हिंदी’ निर्धारित की गई है। इसके अंतर्गत हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की संभावनाओं, भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन, साहित्य के वैश्विक प्रसार तथा विभिन्न भाषायी और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संवाद पर व्यापक विमर्श होगा। डॉ. निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाएँ हमारी सांस्कृतिक अस्मिता, ऐतिहासिक चेतना और समृद्ध ज्ञान परंपरा की संवाहक हैं। हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं का संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रसार हमारी सामूहिक सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव साहित्य, संस्कृति, कला, शिक्षा और विचार के विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों को साझा मंच प्रदान करते हुए इस दिशा में सार्थक संवाद स्थापित करेगा।
महोत्सव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलाधिपति और शिक्षा जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। इस सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं की भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश, शोध एवं नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और भविष्य की शैक्षिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

महोत्सव के पाँच दिवसीय कार्यक्रम में समकालीन कला एवं भारतीय सौंदर्यबोध, समाज और राष्ट्र निर्माण में नारी की भूमिका, मीडिया एवं डिजिटल संस्कृति, समकालीन कथा-साहित्य, साहित्य का डिजिटलीकरण, हिंदी कविता और युगचेतना तथा भारतीय भाषाओं के मध्य अनुवाद जैसे विषयों पर सत्र आयोजित होंगे। इसके अतिरिक्त विदेशों में हिंदी शिक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानवीय संवेदनाएँ, जलवायु परिवर्तन एवं हिमालय, विकसित भारत और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे समसामयिक विषयों पर भी विमर्श किया जाएगा। वेद, पुराण और उपनिषद सहित भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े सत्रों में भारत की बौद्धिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत के विविध पक्षों पर चर्चा होगी।
उत्तराखंड की भाषायी एवं सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्त्व देते हुए हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं का कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। लोककला, लोकसाहित्य, लोकसंस्कृति, प्रकृति एवं पर्यटन तथा वैश्विक युवा संवाद भी महोत्सव के प्रमुख आकर्षण होंगे। प्रवासी साहित्य और वैश्विक प्रवासी चेतना पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय सत्रों के साथ पुस्तक मेले, बाल सृजन उत्सव, कला गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्य एवं संस्कृति के विविध आयामों को अभिव्यक्ति मिलेगी।
महोत्सव के अंतिम दिन, 29 अक्टूबर को योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की भारतीय दृष्टि पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात अंतरराष्ट्रीय विमोचन, सम्मान समारोह और समापन कार्यक्रम संपन्न होंगे।

डॉ. निशंक ने विश्वास व्यक्त किया कि लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव भारतीय भाषाओं के वैश्विक प्रसार, साहित्यिक विमर्श और सांस्कृतिक सहभागिता को नई गति देगा। यह आयोजन भारत की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को विश्व समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करने तथा विभिन्न देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद को सुदृढ़ करने का महत्त्वपूर्ण मंच बनेगा।
महोत्सव का उद्घाटन उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ० ढाल सिंह बिसेन और समापन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे,इस बीच कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रीगण ,प्रदेश के मंत्रीगण, सांसद,विधायक सहित अध्यात्म और सिने जगत की अनके विभूतियां समलित होगी।
पत्रकार वार्ता में पद्मश्री डॉ. आर. के. जैन, डॉ. सविता मोहन, लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक, वी. एम. उपाध्याय सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।




