
देहरादून: 20.10.2026
उत्तराखंड में पहली बार LED एवं लेज़र लाइटों से सजे 80 फीट ऊँचे रावण और 65-65 फीट के कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का भव्य दहन; लोकसंस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियों से सजा दशहरा उत्सव!
देहरादून : रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजी.) द्वारा रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव–2026 के अंतर्गत दशहरा पर्व श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर LED एवं लेज़र लाइटों से सजे 80 फीट ऊँचे रावण तथा 65-65 फीट ऊँचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का भव्य दहन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। इसके साथ ही लंका के पुतले का भी दहन किया गया। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक धार्मिक आस्था के अद्भुत संगम ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


पुतला दहन से पूर्व आयोजित सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, लोकपरंपराओं और लोककलाओं की रंगारंग प्रस्तुतियों ने दशहरा उत्सव को विशेष बना दिया। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला धरोहर को देहरादून में पुनर्जीवित कर उसे पूरे उत्तराखंड और देशभर में पहचान दिलाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। आज इस रामलीला की गूंज पूरे भारत में सुनाई दे रही है, जो समस्त उत्तराखंडवासियों के लिए गौरव का पल है। इस भव्य आयोजन के माध्यम से हमारी सनातन संस्कृति और उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास सराहनीय है।


समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक रामलीला, टिहरी बांध के निर्माण के बाद पुरानी टिहरी के जलमग्न होने के कारण विस्थापन की पीड़ा से जुड़ी रही है। इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर को देहरादून में पुनर्जीवित करना और इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना समिति का संकल्प रहा है। आज यह रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का प्रतीक बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में इस रामलीला को डिजिटल माध्यमों से 82 लाख से अधिक लोगों ने देखा था। इस वर्ष समिति का लक्ष्य एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक इस ऐतिहासिक रामलीला को पहुँचाना है। LED एवं लेज़र तकनीक के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को नए और आकर्षक स्वरूप में प्रस्तुत करने का उद्देश्य हमारी परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।
इस अवसर पर पूर्व विधायक राजकुमार, रेसकोर्स गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष बलबीर सिंह बन्नी, पार्षद वीरेंद्र बिष्ट, जावेद आलम एवं श्री राकेश ओबेरॉय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
समिति की ओर से अध्यक्ष अभिनव थापर, सचिव अमित पंत, निर्देशक अनुराग पंत तथा समिति के सदस्य नरेश कुमार, दुर्गा भट्ट, गिरीश पैन्यूली, अजय पैन्यूली, नीता बहुगुणा, शशि पैन्यूली एवं कुशन नेनवाल सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन भारती आनंद ने किया।
समिति ने महोत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, कलाकारों, स्वयंसेवकों, सहयोगियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। साथ ही सभी से उत्तराखंड की ऐतिहासिक रामलीला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहभागी बनने की अपील की।






