उत्तराखंड

उत्तराखंड में जमीन घोटाले का आरोप, यशपाल आर्य ने ऊर्जा सचिव को कटघरे में खड़ा किया

ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव सुंदरम पर यशपाल का तीखा प्रहार

सरकारी जमीनों को खुदबुर्द कर रही सरकार

मीनाक्षी सुंदरम एक हाथ से जमीन ले रहे दूसरे हाथ से दे रहे जमीनें

आरोपः सिंगल विंडो सिस्टम यानी भ्रष्टाचार का नमूना

देहरादून। कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष ने आज पार्टी विधायकों और नेताओं के साथ एक साथ आकर मीडिया के सामने सरकार के ऊर्जा सचिव को कटघरे मे खडा करते हुए उन पर यह कहकर प्रहार किया कि वह एक हाथ से जमीनें खरीद रहे हैं और दूसरे हाथ से जमीनें दे रहे हैं। सरकार जमीनों को खुदबुर्द करने की लगातार कोशिश कर रही है और यहां तक कटाक्ष किया कि सिंगल विंडो मतलब भ्रष्टाचार का नमूना।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह 27 सरकारी जमीनों को निजी हाथों में देने की तैयार कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने आज एक के बाद एक सरकार के कई घोटालों को लेकर कटघरे मे खडा किया और बताया कि किस तरह से सरकार घोटालेबाजों को बचाने के लिए आगे आ रखी है।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आज मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि सरकार राज्य में जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है लेकिन वह सरकारी जमीनों को लगातार खुर्दबुर्द करने की कोशिश में जुटी हुई है।

उन्होंने कहा कि विकासनगर जल विद्युत परियोजनायें, वहां के काश्तकारों से 1952 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जमीनें उपलब्ध करवाई थी लेकिन अब वो जमीनें खुर्दबुर्द करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सचिव भी मीनाक्षी सुंदरम हैं और नियोजन सचिव के साथ-साथ वह यूआईआईडीए बोर्ड के सचिव भी वही हैं। उन्होंने कहा कि विकासनगर जल विद्युत परियोजना की 76 एकड़ जमीन है और उसे खुदबुर्द करने की तैयारी चल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मीनाक्षी सुंदरम एक हाथ से जमीन ले रहे हैं तो एक हाथ से जमीन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीनों को निजी हाथों में देने की तैयारी में जुटी हुई है और कहा कि उद्यान घोटाले में जांच रोकने के लिए सरकार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पडा।

उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग के घोटाले पर उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था और उसके प्रबंध निदेशक को सरकार ने उसके मूल राज्य में उसे रिलीव कर दिया था। यशपाल आर्य ने सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दों पर खूब घेरा।

विधान सभा स्थित कक्ष सं. 120 में प्रेस वार्ता करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था और राज्य के बजट को लेकर सरकार को कड़े शब्दों में घेरा और कहा कि उत्तराखण्ड में शासन-प्रशासन की स्थिति अत्यंत चिंताजनक होती जा रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं बल्कि शिष्टाचार बनता जा रहा है।

सरकार भले ही “जीरो करप्शन” का नारा देती हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि भर्ती, ठेकों, योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानांतरण तक हर स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में शिकायतें मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने के बावजूद समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, जिससे जनता के बीच यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार करने वालों को संरक्षण मिल रहा है।

उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच विभिन्न योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले सामने आए हैं। देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना, बिजली व्यवस्था, खनन और अन्य विभागों में वित्तीय कुप्रबंधन के उदाहरण राज्य की वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।

आर्य ने राज्य की कानून व्यवस्था पर भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2022 के बाद अपराधों की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राजधानी देहरादून में अल्प समय के भीतर कई हत्याओं की घटनाएँ होना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जब राजधानी में ही अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हों, तो प्रदेश की जनता में असुरक्षा की भावना स्वाभाविक है। महिला अपराधों, साइबर अपराधों और गंभीर आपराधिक घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहते हैं और पुलिस की निष्पक्षता व प्रशासनिक जवाबदेही पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में ईमानदार अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिल रहा, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। विधानसभा में बजट पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश की वास्तविक समस्याओं से मुंह मोड़ने वाला बजट है।

इसमें न तो आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने की स्पष्ट योजना दिखाई देती है और न ही बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का कोई ठोस खाका है। उन्होंने कहा कि राज्य पर बढ़ते कर्ज, हजारों रिक्त सरकारी पदों, पलायन, किसानों की समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों पर बजट में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गैरसैंण के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय बढ़ाने और पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस नीति और बजटीय प्रावधानों की आवश्यकता है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और आर्थिक प्रबंधन से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और प्रदेश की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि शासन व्यवस्था पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायपूर्ण है। प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के अलावा प्रीतम सिंह, काजी निजामुद्दीन, विक्रम सिंह नेगी, लखपत सिंह बुटोला उपस्थित रहे।

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